Monday, July 11, 2011

खीज रस...

घडी की तरफ नज़र दौड़ाई  तो देखा …10 बज  चुके  थे ….पूरे दिन क्या करना है, उसके लिए  दिमाग में खाका  तैयार करना था . काफी मशक्कत  के बाद  वह खाका तैयार हो गया.. …खिड़की से बाहर झाँक कर देखा  तो ऐसा लगा  7 ही बजा है... दुबारा घडी की तरफ देखा...कुछ देर देखता रहा....पता चला घडी बंद है....  मोबाइल पे टाइम देखा तो 7  ही बजे थे … दिमाग में बने खाके को,  इन  3 घंटो ने झिंझोड़ दिया...अब कोशिश कर रहा था, इन तीन घंटों को पुराने तैयार खाके में किस तरफ फिट करूँ....वैसे भी सामने फिर से एक पूरा लम्बा दिन मुंह बाये खड़ा था..और ऊपर से bonus  में मिले इन तीन घंटों ने, उस दिन की उम्र कुछ और लम्बी कर दी थी ...जिसकी सजा मुझे भुगतनी थी …सोचा …इन 3 घंटों  को खाके में ना फिट करके, अलग खर्च करता  हूँ …कुछ ऐसा काम जो तयेशुदा ना हो... कुछ creative...Creative..यह शब्द इतनी बार मुझे अपने  आसपास सुनने मिलता था कि मेरी भी  इच्छा थी कि कभी इससे अपने साथ रखूं...ना सही permanently ... कुछ समय के लिए मेरे साथ रह ले बस... अब 3 bonus घंटो में creativity की याद आ गई …फिर  क्या था ...मोबाइल  पे  3 घंटे बाद का अलार्म सेट किया...…फिर  घर के चारों ओर नज़र दौड़ाई . किताबों की अलमारी को खिसकाकर दीवार के दूसरे कोने में ले गया, …shoe rack को दरवाज़े के दाई तरफ से बाएं तरफ रख दिया....बिस्तर को किताबों की पुरानी जगह..इसी  तरह  …कुछ और चीज़ों  को एक कोने से दुसरे कोने पर...इस पूरे फैरोबदल के बाद घर काफी Creative लगा...(मेरे नज़रिए से ) टाइम देखा तो पता चला अभी १.३० घंटा ही बीता है ..इतना ही समय ओर बचा है....एक बार फिर शरीर की धीर सारी नसों में से दिमाग को जाने वाली नस ने  तेज़ी से काम करना शुरू कर दिया  …चाय बनाई , जो चाय  5 मिनट में बनती थी, उसे १० मिनट  तक खोलाया .., ५ मिनट .सिगरेट ने ले लिए...पेपर ओर पेन लेकर कहानी लिखने का सोचा …कहानी तो लिखी नहीं गई सोच- विचार में  आधा घंटा चला गया...इस सारे कर्मकांड में  Creativity पीछे छुट गई …( जो मुझे लग रहा था पहले साथ में थी )...फिर अपना पुराना फोटो एल्बम खोलकर बैठ गया... फ़िल्मी तरीके से....पुरानी  black & white फोटो को देखकर पूरे चारे में वीर, शांत, हास्य, अदभूत रस कुछ-कुछ के लिए आते-जाते... मेरी इस आत्ममुग्धता को मोबाइल के अलार्म ने तोडा …ओर एक ख़ुशी मेरे चेहरे पर दौड़ गई की  bonus 3 घंटो  को मैंने अच्छी से utilise किया था...10 बज चुके थे..तभी दूसरी तरफ ख़याल दिमाग में कौंधा की...3  घंटे तो बीत गए... पर  अबी जी पूरा दिन बचा है उसको कैसे  utilise किया जाए...ओर फिर एक ही रस मेरे चहरे पे छा गया...खीज रस.....


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