Monday, July 11, 2011

स्याही

कलम के अन्दर स्याही बनकर बिखरना है कागज़ पे

कि हर इक रचना के माध्यम से अलग अलग लोगों के अस्तित्व को उकेरता 
जाने कितने भावों, संवेदनाओं, रसों, अलंकारों  को स्वयं के गर्भ से 
निकालकर पन्नो पे इक नए जीवोत्पत्ति का रचियता बनना 

कभी इतिहास, कभी भूगोल, ज्यामिति और विज्ञानं बनना 
हर दिन एक नए शब्द संसार में प्रवेश और प्रस्थान करना
कल्पना और यथार्थ, अतीत और वर्तमान से होता हुआ
अंत में वापिस दवात में स्वयं को पूरी तरह रिक्त करना
अगले अनुभव के लिए.....













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