Monday, July 11, 2011

" पानी".....

घर के अन्दर, खटिया में बैठे....दो जगह से टपकते पानी की रोकथाम का उपाय सोच रहा था. एक जो उप्पर छज्जे से टपक रहा था...और जो दूसरा मेरी बगल में बैठी भागवान की आँखों से झर-झर बह रहा था ...छज्जे से टपकता पानी शायद M - Seal से बंद हो जाएगा...मगर भागवान को चुप कराने के लिए, सहानुभूति की M -Seal लगाने में काफी मशक्कत करनी पड़ेगी. ऊपर से M -Seal कितनी देर बहते टसुओं को रोक पाएगी, यह भी कहना मुश्किल था... भागवान थोड़ी देर बाद खटिया पर से उठी और बाल्टी उठाकर टपकते पानी के नीचे लगा दी..पानी बाल्टी के अन्दर गिरने लगा...बारिश ज़ोरों पर थी और धीरे-धीरे बाहर सड़क को पानी भी घर के भीतर जमा होने लगा...पहले से ही ईंटें लगाकर ज़रूरी सामान को थोडा सी ऊँची सतह पर रख दिया था...कुछ ही देर में छज्जे से टपका पानी बाल्टी में ना गिरकर, घर के भीतर जमे पानी से आलिंगन कर रहा था...बाल्टी घर के भीतर तैर रही थी..अब मेरे तीन तरफ पानी था..बगल में, छज्जे पे और फर्श पर....'जल ही जीवन है' के मायने मुझे बदलते दिखाई दे रहे थे...जो बाल्टी टपकते पानी को रोकने के लिए लगाईं थी अब उसका इस्तमाल भीतर जमा पानी को घर से खिड़की से बाहर फैकने के लिए होना था..अपनी महत्ता शायद बाल्टी जान गई थी इसलिए वो हाथ में ना आकर खटिया के नीचे घुस चुकी थी..झाड़ू से किसी तरह उसे बाहर निकाल कर उसकी औकात याद दिलाई... भागवान ने कसेडी उठाई और उससे पानी बाहर फैकने लगी और में बाल्टी से...बारिश थम चुकी थी.....भीतर जमा पानी भी बाहर फेंका जा चुका था....थककर मैं और भागवान खटिया पे बैठे थे...पानी का टपकना  दोनों जगह से बंद हो चूका था....सिवाए मेरे माथे से टपकते पसीने के....थोड़ी देर बाद भागवान उठी और भीतर रसोई से हाथ में गिलास लेकर आ गई और मुझसे कहा..." पानी".....




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